दिल्ली में नकली सोने से करोड़ों का गोल्ड लोन घोटाला: EOW ने पकड़ा रैकेट, गोल्ड अप्रेजर गिरफ्तार

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Multi-crore gold loan scam using fake gold in Delh

नई दिल्ली। Multi-crore gold loan scam using fake gold in Delh, नकली सोने के आभूषणों को असली बताकर करोड़ों रुपये का गोल्ड लोन पास करने वाले रैकेट का दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने भंडाफोड़ किया है।

इस मामले में कंपनी के ही गोल्ड अप्रेजर को गिरफ्तार किया है, जिसकी पहचान रोहिणी के बुद्ध विहार के पंकज कुमार के रूप में हुई है।वह वर्ष 2014 से साई फिनकार्प प्राइवेट लिमिटेड में गोल्ड अप्रेजर के पद पर कार्यरत था।

683 फर्जी गोल्ड लोन अकाउंट तैयार किए

जांच में पता चला है कि आरोपित ने अपने साथियों के साथ मिलकर 683 फर्जी गोल्ड लोन अकाउंट तैयार किए और उनके जरिए 3.81 करोड़ रुपये से अधिक की रकम निकाल ली।

हैरानी की बात यह है कि कंपनी को लंबे समय तक इस फर्जीवाड़े की भनक तक नहीं लगी। मामला तब सामने आया, जब इंटरनल ऑडिट के दौरान रिकाॅर्ड में भारी गड़बड़ी मिली।

ऑडिट में गायब मिला असली सोना 

ईओडब्ल्यू के उपायुक्त अमित वर्मा के मुताबिक, गोल्ड लोन देने वाली कंपनी ने नियमित इंटरनल ऑडिट कराया था। इसी दौरान सबसे पहले करीब 14.11 लाख रुपये कीमत के असली सोने के नौ पैकेट गायब मिले।

इसके बाद जब लोन खातों की गहन जांच हुई तो पता चला कि वर्ष 2022 से 2025 के बीच 683 फर्जी गोल्ड लोन अकाउंट खोले गए थे। इन खातों में नकली सोने के आभूषण गिरवी दिखाकर 3.81 करोड़ का लोन जारी कर दिया गया।

नकली सोने को दिया असली का सर्टिफिकेट

जांच में सामने आया कि पंकज कुमार कंपनी में गोल्ड अप्रेजर था। उसकी जिम्मेदारी गिरवी रखे गए सोने की जांच करना और उसकी शुद्धता का प्रमाण देना था।

आरोप है कि उसने इसी जिम्मेदारी का दुरुपयोग किया। वह नकली और कृत्रिम सोने के आभूषणों को असली बताकर उनकी वैल्यू तय करता था। इसके बाद फर्जी केवाईसी दस्तावेज और काल्पनिक ग्राहकों के नाम पर लोन फाइल तैयार कर दी जाती थी। इसी आधार पर करोड़ों रुपये के गोल्ड लोन जारी कर दिए गए।

फर्जी खातों में ब्याज भी जमा कराया

ईओडब्ल्यू की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपित और उसके साथी सिर्फ फर्जी खाते बनाकर नहीं रुके। उन्होंने कंपनी की नजरों से बचने के लिए इन खातों में समय-समय पर ब्याज भी जमा कराया, ताकि वे सक्रिय और नियमित दिखाई दें।

साथ ही लोन मैनेजमेंट सिस्टम में फर्जी एंट्री कर रिकार्ड को भी दुरुस्त दिखाया जाता रहा। इसी वजह से यह खेल करीब तीन साल तक चलता रहा और किसी को शक नहीं हुआ।

आगे की जांच में जुटी EOW

पुलिस ने लोन फाइलों, केवाईसी रिकाॅर्ड, ऑडिट रिपोर्ट, बैंक खातों और अन्य दस्तावेजों की जांच के बाद सात जुलाई को पंकज कुमार को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने फर्जी खाते बनाने और नकली सोने के इस्तेमाल की बात स्वीकार की है।

अब ईओडब्ल्यू यह पता लगाने में जुटी है कि नकली सोना कहां से आता था, फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए, गायब असली सोना कहां गया और इस पूरे खेल में किन-किन लोगों की भूमिका रही।